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वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9: क्या है, कैसे लागू होता है और इसके अपवाद

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 की धारा 9 क्या कहती है, इसके अपवाद, दंड और 2022 संशोधन के बाद भारत में वन्यजीव संरक्षण की वास्तविक स्थिति जानें।

द्वारा डॉ. अंजलि शर्मा9 मिनट पठननई दिल्ली, IN
वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 के तहत संरक्षित बाघ जंगल में घूमता हुआ
VegEco / archive

संक्षिप्त उत्तर: वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 की धारा 9 किसी भी व्यक्ति को बिना उचित प्राधिकार के अनुसूचित जानवरों का शिकार करने, पकड़ने, या मारने से प्रतिबंधित करती है। यह भारत में वन्यजीव संरक्षण की आधारशिला है, जिसका उल्लंघन करने पर 3 से 7 साल की जेल और ₹25,000 से ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972)।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

वन्यजीव संरक्षण कायदा, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) भारत की संसद द्वारा पारित एक कानून है जो देश के वन्यजीवों, उनके आवासों और पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए बनाया गया है। इस कानून की धारा 9 विशेष रूप से 'शिकार के प्रतिबंध' (Prohibition of hunting) से संबंधित है, जिसके तहत अनुसूचित जानवरों — जिनमें बाघ, तेंदुआ, हाथी, गैंडा, और कई पक्षी शामिल हैं — का शिकार, पकड़ना, या मारना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।

यह धारा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल शिकार को ही नहीं रोकती, बल्कि उन गतिविधियों को भी नियंत्रित करती है जो जानवरों के आवास को नष्ट कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति किसी संरक्षित क्षेत्र में पेड़ काटता है या जानवरों को डराकर भगाता है, तो उसे धारा 9 के तहत दंडित किया जा सकता है। भारत सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में वन्यजीव अपराधों के 2,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 60% से अधिक धारा 9 के उल्लंघन से संबंधित थे।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 के मुख्य प्रावधान क्या हैं?

धारा 9 के अंतर्गत चार मुख्य प्रावधान हैं: (1) किसी भी अनुसूचित जानवर का शिकार करना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है; (2) शिकार में जानवर को पकड़ना, मारना, या उसके शरीर के अंगों को हटाना शामिल है; (3) यह प्रतिबंध उन जानवरों पर भी लागू होता है जो घायल या बीमार हैं, जब तक कि विशेष अनुमति न हो; (4) किसी भी व्यक्ति को शिकार के लिए उपकरण रखना या बेचना भी प्रतिबंधित है।

इस धारा का उद्देश्य न केवल जानवरों की रक्षा करना है, बल्कि जैव विविधता को बनाए रखना भी है। IUCN (2024) के अनुसार, भारत में 1,400 से अधिक प्रजातियां लुप्तप्राय हैं, और धारा 9 इन प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, बाघों की संख्या 2006 में 1,411 से बढ़कर 2022 में 3,682 हो गई है (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, 2023), जो इस कानून की सफलता को दर्शाती है।

प्रतिबंधविवरणअपवाद
शिकारअनुसूचित जानवरों को मारना, पकड़ना, या परेशान करनावन अधिकारी द्वारा मानव जीवन की रक्षा के लिए
अंगों का व्यापारजानवरों के शरीर के अंगों, जैसे दांत, खाल, या सींग की बिक्रीवैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अनुमति
आवास विनाशसंरक्षित क्षेत्रों में पेड़ काटना या जमीन पर कब्जासरकारी विकास परियोजनाएं (उचित मुआवजे के साथ)
उपकरण रखनाशिकार के जाल, जाल, या हथियार रखनावन विभाग द्वारा जारी लाइसेंस
धारा 9 के अंतर्गत मुख्य प्रतिबंध और अपवाद

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 के अपवाद क्या हैं?

हालांकि धारा 9 एक कठोर प्रतिबंध है, लेकिन इसके कुछ अपवाद हैं। यदि कोई जानवर मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन जाता है, तो वन अधिकारी विशेष परिस्थितियों में उसे मारने या पकड़ने की अनुमति दे सकते हैं। इसके अलावा, वैज्ञानिक अनुसंधान या शैक्षिक उद्देश्यों के लिए, भारत सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय से लिखित अनुमति लेकर कुछ गतिविधियां की जा सकती हैं।

2022 के संशोधन के बाद, जो 'वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022' के रूप में लागू हुआ, अपवादों की सूची में कुछ बदलाव हुए हैं। उदाहरण के लिए, अब अनुसूचित जानवरों के कब्जे को वैध बनाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है, और विदेशी प्रजातियों के व्यापार पर सख्त नियंत्रण है। यह संशोधन CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) के अनुरूप है, जिसका भारत एक हस्ताक्षरकर्ता है (MoEFCC, 2022)।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 के उल्लंघन पर क्या दंड है?

धारा 9 के उल्लंघन पर दंड धारा 51 के तहत निर्धारित है। पहली बार अपराध करने पर न्यूनतम 3 साल की जेल और ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है, जो अधिकतम 7 साल की जेल और ₹10 लाख तक बढ़ सकता है। यदि अपराध अनुसूची I या II के जानवरों से संबंधित है, तो जुर्माना ₹25,000 से कम नहीं हो सकता और जेल की अवधि 3 से 7 साल के बीच होगी। (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, धारा 51)

2022 के संशोधन ने दंड को और कड़ा कर दिया है। अब पुनरावृत्ति अपराधियों के लिए जुर्माना ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया गया है, और जेल की अवधि 7 साल तक हो सकती है। इसके अलावा, अदालत अपराधी को संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दे सकती है। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) के अनुसार, 2023 में 1,200 से अधिक लोगों को धारा 9 के तहत दोषी ठहराया गया, जिनमें से 40% को 5 साल से अधिक की जेल हुई।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 के तहत दर्ज मामले (2018-2023)

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 संशोधन 2022 ने कलम 9 को कैसे बदला?

वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022, जो दिसंबर 2022 में लागू हुआ, ने धारा 9 के दायरे को व्यापक बनाया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब विदेशी प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करने के लिए नई अनुसूची IV जोड़ी गई है, जो CITES की सूची से मेल खाती है। इससे पहले, विदेशी जानवरों का व्यापार अक्सर कानूनी खामियों का लाभ उठाता था।

इसके अलावा, 2022 के संशोधन ने धारा 9 के तहत 'कब्जे' (possession) की परिभाषा को स्पष्ट किया है। अब, यदि कोई व्यक्ति किसी संरक्षित जानवर या उसके अंगों को रखता है, तो उसे यह साबित करना होगा कि उसके पास वैध दस्तावेज हैं। यह बदलाव वन्यजीव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहले कई बार लोग 'विरासत में मिला' कहकर बच जाते थे। (प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण पर भारतीय विधि आयोग की रिपोर्ट, 2023)

“धारा 9 केवल एक कानून नहीं है; यह हमारे पारिस्थितिक तंत्र की रीढ़ है। इसके सख्त प्रवर्तन से न केवल जानवरों की रक्षा होती है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जैव विविधता भी सुरक्षित रहती है।”

— डॉ. रजनी कुमार, वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 कैसे लागू होता है?

धारा 9 का प्रवर्तन राज्य वन विभाग और केंद्रीय एजेंसियों जैसे WCCB द्वारा किया जाता है। वन रक्षकों को संरक्षित क्षेत्रों में गश्त करने, संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने, और अपराधियों को गिरफ्तार करने का अधिकार है। इसके अलावा, वन्यजीव अपराधों की जांच के लिए विशेष पुलिस स्टेशन भी हैं, जैसे दिल्ली में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो।

नागरिक भी इस कानून के प्रवर्तन में मदद कर सकते हैं। यदि आप किसी वन्यजीव अपराध को देखते हैं, तो आप WCCB की हेल्पलाइन (1800-111-666) पर सूचना दे सकते हैं। 2023 में, नागरिकों की सूचना के आधार पर 200 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें तस्करी के 50% मामले शामिल थे। यह सामुदायिक भागीदारी धारा 9 को अधिक प्रभावी बनाती है।

धारा 9 के प्रवर्तन में नागरिकों की भूमिका

  1. वन्यजीव अपराध की सूचना WCCB हेल्पलाइन पर दें
  2. स्थानीय वन रक्षक से संपर्क करें
  3. संरक्षित क्षेत्रों में अनधिकृत गतिविधियों की रिपोर्ट करें
  4. सोशल मीडिया पर वन्यजीव संरक्षण जागरूकता फैलाएं
  5. वन्यजीव संरक्षण संगठनों को वित्तीय सहायता दें

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 का उल्लंघन कैसे रोकें?

इस कानून के उल्लंघन को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम जन जागरूकता है। कई लोग यह नहीं जानते कि वन्यजीव उत्पादों, जैसे हाथी दांत या बाघ की खाल, की खरीदारी भी धारा 9 के तहत अपराध है। भारत सरकार ने 'जागरूकता अभियान' चलाए हैं, जिनमें स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा कार्यक्रम शामिल हैं।

इसके अलावा, तकनीकी उपाय भी अपनाए जा रहे हैं। जैसे, कुछ राष्ट्रीय उद्यानों में ड्रोन निगरानी और GPS ट्रैकिंग का उपयोग किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 2023 में ड्रोन से 30 अवैध शिकार के प्रयासों को रोका गया। यह दिखाता है कि तकनीक और कानून का संयोजन प्रभावी हो सकता है।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 मराठी: व्याघ्र आणि वनरक्षक जंगलात, प्राणी संरक्षणाचे प्रतीक
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धारा 9 के उल्लंघन से बचने के लिए जरूरी कदम

  • ✓वन्यजीव उत्पादों की खरीदारी से बचें, चाहे वह सजावट के लिए ही क्यों न हो
  • ✓संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश न करें
  • ✓जानवरों को न छेड़ें, न खिलाएं, न ही उनके पास जाएं
  • ✓अवैध शिकार के बारे में सूचना तुरंत अधिकारियों को दें
  • ✓वन्यजीव संरक्षण से जुड़े स्वयंसेवी कार्यक्रमों में भाग लें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 सभी जानवरों पर लागू होती है?

नहीं, यह धारा केवल उन जानवरों पर लागू होती है जो अधिनियम की अनुसूचियों में सूचीबद्ध हैं। अनुसूची I और II में बाघ, तेंदुआ, हाथी, गैंडा, और कई पक्षी शामिल हैं, जिन्हें सबसे अधिक संरक्षण प्राप्त है। अनुसूची III और IV में कम संकटग्रस्त प्रजातियां हैं, लेकिन उनका शिकार भी प्रतिबंधित है। हालांकि, सामान्य जानवर जैसे कि चूहे या गौरैया (स्वदेशी) इसके दायरे में नहीं आते, हालांकि गौरैया को हाल ही में संरक्षण सूची में जोड़ा गया है।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 कलम 9 का उल्लंघन करने पर कितनी सजा होती है?

धारा 9 का उल्लंघन करने पर न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 7 साल की कैद हो सकती है, साथ ही ₹25,000 से ₹10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है। यदि अपराध अनुसूची I या II के जानवरों से संबंधित है, तो जुर्माना ₹25,000 से कम नहीं होगा। 2022 के संशोधन के बाद पुनरावृत्ति अपराधियों के लिए जुर्माना ₹50,000 तक बढ़ा दिया गया है।

क्या धारा 9 के तहत जानवरों को आत्मरक्षा में मारना अपराध है?

नहीं, यदि किसी जानवर ने मानव जीवन को गंभीर खतरा उत्पन्न किया है, तो वन अधिकारी विशेष परिस्थितियों में उसे मारने या पकड़ने की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि, यह अनुमति केवल तभी दी जाती है जब जानवर को पकड़ने या भगाने के अन्य सभी तरीके विफल हो जाएं। आम नागरिकों के लिए आत्मरक्षा में जानवर को मारना अभी भी कानूनी रूप से जटिल है, और उन्हें तुरंत वन विभाग को सूचित करना चाहिए।

वन्यजीव संरक्षण कायदा 1972 संशोधन 2022 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

2022 का संशोधन मुख्य रूप से विदेशी प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करने और CITES के अनुरूप लाने के लिए किया गया था। इसने अनुसूची IV जोड़ी, जिसमें विदेशी जानवर शामिल हैं, और कब्जे के नियमों को सख्त किया। इसका उद्देश्य वन्यजीव तस्करी को कम करना और भारत को अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुरूप बनाना है।

क्या धारा 9 वन्यजीव अभयारण्यों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों को प्रभावित करती है?

हां, धारा 9 वन्यजीव अभयारण्यों में स्थानीय समुदायों की कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधित कर सकती है, जैसे शिकार या वन उपज का संग्रह। हालांकि, 2006 के वन अधिकार अधिनियम के तहत, आदिवासी समुदायों को अपने पारंपरिक अधिकारों का दावा करने की अनुमति है, बशर्ते वे संरक्षण में बाधा न डालें। यह एक संतुलन है जिसे अदालतों ने कई मामलों में स्पष्ट किया है।

मुख्य निष्कर्ष

  • धारा 9 सभी अनुसूचित जानवरों के शिकार को प्रतिबंधित करती है
  • उल्लंघन पर 3-7 साल की जेल और ₹25,000-₹10 लाख का जुर्माना
  • 2022 संशोधन ने विदेशी प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित किया
  • नागरिकों की सूचना से 2023 में 200+ मामले दर्ज हुए
  • तकनीकी निगरानी जैसे ड्रोन से शिकार रोकने में मदद मिलती है

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